Joker
Updated: Jul 4, 2025
By Rachana Nagar
अतरंगी सा लिबास उसका
मैंने देखा सतरंगी से बाल हैं।
नाक उसका टमाटर जैसा
होठों पर नकली मुस्कान है।
देखी आंखों में मजबूरी उसकी
शरीर दुबला, कमज़ोर, बेहाल है।
बाहर से दिखता हरफनमौला
मगर भीतर से वो गंभीर है।
उस हंसते चेहरे को देख लगा
वो दिल बेहद ग़मगीन है।
कभी उछलता, कभी नाचता
उछलते-कूदते फिर गिर जाता।
नज़र अंदाज़ करता खरोंचों को
तमाशबीनों के लिए फिर लग जाता।
लोगों को खुद पर हंसते देख
दोबारा जोश से लबरेज़ हो जाता।
थक कर चूर हो चुका होगा
उसकी कांप रही थी टांगें भी।
वो मेहनतकश किसी का बेटा- भाई
शायद होगा कि किसी का बाप भी।
दिन भर की दौड़ धूप के बाद
फक़त चंद रुपए वो कमाता है।
सिलसिला-ए-जि़दगी यूंही चलता रहता है
मैंने देखा वो मुस्कुराते हुए घर लौटता है।
By Rachana Nagar

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