Jeevandarpan
By Dr. Tara Nigam
खुशियां देखो तो हर जग़ह दिखती है
घास पर ओस भी मोतियों सी दिखती है
सुबह की पहली किरण, उम्मीद का सवेरा लाती है
देती है जीने का मौका, दिल में उन्माद जगाती है
वो ढलती शाम, बेहद ख़ूबसूरत दिखती है
कुछ अंत होते हैं ख़ूबसूरत, ये एहसास दिलाती है
ये हवा ये पहर ये सहर, यहाँ कुछ थमता नहीं
आगे बढ़ने की हर पल ललक जगाती है
ख़ुश रहो, हर पल जियो, नीरस होने का अब वक़्त नहीं
थक गए तो रात भी है ना, जो चैन की नींद सुलाती है।
By Dr. Tara Nigam

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