Jariya
By Bhagat singh
लोग लोग नहीं
जरिया होते है
किसी के जहन में
घर करने का जरिया
किसी के ख्वाबो को
बदलने का जरिया
चलता जानी अनजानी
डगरिया है इंसा
एक दूसरे का सहारा
जरिया है इंसा
लोग बदलते है
जरिया बदलता है
नजरिया बदलता है
सिद्धांतो का
हालातो का एक
बहता दरिया है इंसा
एक दूसरे का सहारा
जरिया है इंसा
हालत सिखाते है
सीखते चले जाते है
एक दूसरे के दुख दर्द में
चीखते चले जाते है
इतिहास पढ़ते है
इतिहास बनाते है
छुपी सी छवि का
अपनी ही कमी का
मोहताज हो
जी रहा है इंसा
एक दूसरे का सहारा
जरिया है इंसा
औरों का अंश ले लेकर
खुद-ब-खुद
चाक पर घूमता
घूमता, सेंकता, तपाता
शीतलता की
परिभाषा बतलाता एक
पानी की गगरिया है इंसा
एक दूसरे का सहारा
जरिया है इंसा
गुम होने वाले को
रास्ता देता
खुद गुम होने पर
सितारो को वास्ता देता
घरेलू सा
घुमक्कड़ सा
भीड़ को संभालता
एक गड़रियाँ है इंसा
एक दूसरे का सहारा
जरिया है इंसा॥
By Bhagat singh

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