Jantu
By Riyaj Attar
बड़े बड़े हाथीयों के पैरोंमें डाल दी जंजीर
खूँखार शेर को भी डाला सलाखोंके अंदर
जहरीले नाग को भी नचाया बीन के ऊपर
पीड़ित नहीं धरती पे ऐसा ना कोई जानवर
बेजुबान बेबस जानवरोंकी आझादी छीनकर
बड़ी बेरहमी से उनकी बेवजह जान लेकर
इन्सान घमंड करने लगा अपनी ताकत पर
इतराने लगा के मैं ही भगवान हुँ ये मानकर
जो ना सुनता है ना कहता है ऐसा जीव बनाकर
जो ना देखता हैं ना दिखता हैं ऐसा जंतु भेजकर
कुदरत बदला ले रही इन्सान को औकात दिखाकर
किधर जायेगा कैसे बचेगा अपने कर्मोंसे ये भागकर
जल, जंगल बादल पे राज करनेवाला छुपा डरकर
किसीका भी भगवान नहीं आयेगा मसिहा बनकर
अहंकारी इन्सान अपने पाप धोयेगा अब तू मरकर
माफी माँग तौबा कर सुधर जा तो रहेगा तू बचकर
By Riyaj Attar

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