Intezaar
By Arzoo
आरज़ू ए वस्ल थी और कुछ ना था
मिलने के बाद भी वहीं खड़े रहे
इंतज़ार था तेरा देखने तो आते
गरज़ रहा था आफताब का बेपनाह नूर तब
देख कर तुझे तुझसे ही लिपट जाते
आए होते गर तुम तो अल्फाजों को
आवाज़ मिलती
तुमको हम और हमको तुम्हारी आस मिलती
By Arzoo

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