I Love My India
By Mrs Paramjeet Kaur Jagir Singh Thuain
आर्यावर्त, भारतवर्ष, हिन्दुस्तान देश को मिला नया नाम इण्डिया !!
बडी शान से हम उच्चारण करते निज देश हेतु नया नाम इण्डिया !!
पर एक दिन किसी ने हमसे कहा……
जाओ जरा सर्च करो गूगल में देखो संज्ञा इण्डिया,
होश उड जाएँगे जानकर अर्थ संज्ञा इण्डिया के।
सचमुच…..
लज्जा में डूब गए जानकर वास्तविक अर्थ संज्ञा इण्डिया के,
सोचा क्यों अपनाएँ निज देश हेतु संज्ञा इण्डिया?
अरे भारतीय हैं हम और हमारी सँस्कृति है विशाल,
यूँ ही निराश नहीं होेते और जल्दी नहीं मानते हार !
नए अर्थ लगाए मैंने और न छोडी संज्ञा इण्डिया,
बडे गर्व से अपनाई देश हेतु मैंने संज्ञा इण्डिया !
देखो -I-N-D-I-A- से बनती संज्ञा इण्डिया।
अब देश को मिला……..
I से ईश्वरीयता का वरदान,
यहीं तो स्वयम् ईश्वर आकर देते सच्ची गीता का ज्ञान !
फिर N से मिली हमारी सँस्कृति को एकदम शुद्ध नम्रता,
वेदों की रचना कर छिपाया अपना नाम ,यही तो है शुद्ध नम्रता !
D से मिलता ,पवित्र लक्ष्मी -नारायण सा पूर्ण देवत्व,
सतयुग में वर्षों फूला-फला इसी देश में देवत्व !
फिर I से मिल गई विश्व को यहीं से इन्सानियत,
इसी देश ने सिखलाई विश्व को उचित इन्सानियत !
अब बचा A- इस A से मिली हमें आध्यात्मिकता,
इस देश को विश्व-गुरू बनाती ,यहाँ की ही आध्यात्मिकता !
ईश्वरीयता, नम्रता, देवत्व,इन्सानियत और आध्यात्मिकता
के बल पर - शान से बोलो इण्डिया मेरा देश है !
इन पंचों के बल - बूते पर ,झूम के गाओ …………
INDIA मेरा देश है।
तो फिर गाओ ……..I love my lndia……. I love my India
By Mrs Paramjeet Kaur Jagir Singh Thuain

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