Hai Himmat
By Deepak Malik
गैर हिम्मत ना होती तो क्या होता वो जो था वही गुमनाम सा रह जाता ख्वाब ना होते तो क्या होता वो जो था वहीं धूल खा रहा होता हिम्मत हौसला वो यूं समेटते रहा हर किसी से खुद ही लड़ता रहा
चपल्लों में लगे कांटे थे जो दर्द को भुला गए तेरा साथ होना ही था जो मुकाम दिला गए कुछ खास कपड़े नहीं रहे तन पर उसके बेखास सा वो कुछ यूं ही खास बनता गया सब्र का दामन पकड़ वो चुप सा आसमां कि उड़ान भरता गया तेरे जाने के बाद हौसला टूटते देखा उसने दुनिया पल में इधर से उधर होते देखा उसने तेरी थाली में साथ खाने वाला वो अकेले हाथ में रोटी पकड़े दिखा वो तेरे दिखाए सपने ही थे आंखो में उसके वो सब आंसू पोंछ चलता रहा वो खुद हर किसी से लड़ता रहा। वो बस यूं चलता रहा।।
By Deepak Malik

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