Gazal-Tanhai
By Dr Kavita Singh
न मिले तुम, न तुम्हारी कोई ख़बर आई
मुझसे मिलती है, गले आज मेरी तन्हाई....
तेरी यादों से बनाया है, एक छोटा सा घर
इसमें रहती हूँ,मैं और मेरी तन्हाई
न मिले तुम, न तुम्हारी कोई ख़बर आई
मुझसे मिलती है, गले आज मेरी तन्हाई....
इश्क में छूने चले थे, आसमां का दामन
क्या कहें अपनी तो, किस्मत में ख़ाक ही आई
न मिले तुम, न तुम्हारी कोई ख़बर आई
मुझसे मिलती है, गले आज मेरी तन्हाई ....
हर कदम पर रहोगे साथ, कहा था तुमने
मगर है साथ, मैं और मेरी तन्हाई
न मिले तुम. न तुम्हारी कोई ख़बर आई
मुझसे मिलती है, गले आज मेरी तन्हाई....
By Dr Kavita Singh

Comments