Gazal-5
Updated: Oct 2, 2024
By Sachin Mujumdar
रेत सी सरक गई ज़िन्दगी हाथ कभी आई नहीं
राज़ की ये बात थी जो मैंने तुम्हे बताई नहीं
जंगल का शेर भूखा ही रहा कई दिनों तक
लेकिन अपनी आदत बदल के घास उसने खाई नहीं
अखबारों की सुर्खियां बनी सनसनीखेज़ खबर
झूठ को बेनकाब करती खबर रास कभी आई नहीं
खरीदने निकले थे हमें दौलत बेशुमार लेकर
लेकिन हमने भी अपनी कीमत कभी गिराई नहीं
चुना है जनता ने तुझे तो जनता की सेवा कर
जनसेवक है तू प्यारे कोई दुर्दान्त आतताई नहीं
By Sachin Mujumdar

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