Gatari
By Riyaj Attar
कायको मनाते है ये गटारी ?
बोलु के ना बोलु ! मेरे दिलकु एक बात बहुतीच है सतारी
आजकल के छोकरा छोकरी कायकु मनाते है ये गटारी ?
गलत रिवाजोंके नामपे, खुदकोच शराब की लत क्युँ है लगारी
जबकी यैच शराब लोगांकु आदमीसे जानवर है बनारी
उधर घरवाली कित्ते प्यारसे तुम्हारे लिए क्या क्या है पकारी
इधर दोस्तांके साथ पीकर अपनेच घरकु शराबसे है जलारी
पता नही फिरभी ये सब लोगां क्युँ ये गटारी है मनारी
खता नही जराभी उल्टा ना पीनेवालोंकोही नीछा जतारी
घटिया हरकता करके, खुदही तमाशा बनके दुनिया को है हसारी
अपनेच हाथोंसे अपनीच इज्जतको कायको मिट्टीमें है मिलारी
कित्ता सारा पैसा खर्चा करके खुदकेच वास्ते ला रे है बिमारी
अच्चे बातां और आदतां के वास्ते दुनिया मे पहचान है हमारी
इसकु बढाने का रह गया उल्टा अपनीच शानको क्युँ है घटारी
बढने का छोडके गिरने के वास्ते ! कायको मनाते है ये गटारी ?
By Riyaj Attar

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