Emotions
Updated: Sep 21, 2022
By Shivvir Singh Bhadauria
रच लूं यादों के रंगों का
मनमोहक दृश्य उमंगों का
मेरे मन के दरवाजे पे
संगीत तेरे पदचिन्हों का
कहना था पहली बार तुम्हें
झंकृत भीतर कुछ तार हुए
बेचैन हुए लाचार हुए
काबू कैसे अहसास किये
क्या कह पाया ,बस मौन रहा
अनकहा अचानक से उमड़ा
चाहा सब कुछ कह डालूं मैं
संकोच का बादल था घुमड़ा
कितने जन्मों से आतुर था
सदियों से कितना मैं प्यासा
कितनी आकुलता उर में थी
न शब्द मिले, न ही भाषा
कितने सुंदर , कितने प्यारे
किस स्वप्नलोक से आये तुम
छवि अनुपम , स्वर कोकिल सा
नयनों के सुंदर तारे तुम
मेरे ख्यालों मेरे ख्वाबों
इस जीवन में जो आये तुम
दो घड़ी मिला जो साथ मुझे
कितना मुझको हर्षाये तुम
जब जब चाहा तुमको छू लूँ
हाथों से तब कुछ छूटा है
जब लगा कि सब सच ही तो है
तब तब बस दिल ये टूटा है
यूं पूर्ण समर्पित प्रेम मेरा
शर्तो के भी आधीन नहीं
आघात हृदय जो लगते हैं
उस पीड़ा का भी अंत नहीं
चाहत मेरी , खिलवाड़ नहीं
अवचेतन ,क्यों अब साथ नहीं
इस प्रेम के सुंदर उपवन पर
ये वज्रपात , सहनीय नहीं
हर बार यही क्यूं होना है
हर बार मुझे क्यों रोना है
जब मेरा कोई दोष नहीं
क्यों मुझको सब कुछ खोना है
अब थका और उत्साह नहीं
ये हार भले, प्रत्यक्ष नहीं
अब आहत हूँ अब घायल हूँ
मानव ही हूँ , कोई वृक्ष नहीं .
आभार हृदय से करता हूँ
जितना भी तुमने साथ दिया
था दंभ अभी तक जो जीता
पर प्रेम में ,सब कुछ हार गया .
आओ ,पकड़ो तुम हाथ मेरा
मैं जाऊं , मत जाने देना
बस राह रोकना , ज़िद करना
बाहों में अपनी भर लेना .
व्याकुल तो हूँ पर चाहत है
तुम झूठी आस ही दे देना
जो सब्र धैर्य मुझमें बाकी
संज्ञान जरा तुम ले लेना
By Shivvir Singh Bhadauria

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