Ek Vakt
Updated: Jul 8, 2025
By Sakshi Saxena
कुछ कह न सकी अपनी सफाई में एक वक्त ज़िंदगी में ऐसा भी आया
मेरे अपनों ने मुझे बदला हुआ पाया
ज़माने ने इस कदर गलत ठुकराया
मोहब्बत को न जाने कौनसा गुनाह बतलाया
मेरी ही नजरों में मुझे गिराया
हर चीज में मैने खुद को हारा हुआ पाया
सबका मैंने विश्वाश गवाया
बुरे वक्त में प्यार ने भी न साथ निभाया
छोड़ मुझे मेरे हाल पर वो तो सब खत्म कर भागा
कुछ पलों का वो वक्त था आया
परेशानी और गमों का सागर वो लाया
अगर वो वक्त न आता
तो कुछ कर दिखा सकू, बना सकू अपनी पहचान ऐसी मेरी चाहत न
जगाता
अगर वो वक्त न आता तो ज़माना मुझे आज इस मुकाम पर न पाता...
By Sakshi Saxena

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