Ek Shakhsh
By Deepak Malik
एक शख्श
एक शख्स जो रोज नए ख्वाब सा हर किसी में अक्स सा हर जिक्र में शामिल सा
लिखे हर लफ्ज़ सा हवा के रुख सा बारिश की बूंद सा सांसों के चलने सा जिस्म पर निशां सा होंठो के सुर्ख रंग सा आयत के पढ़ने सा मंदिर के चढ़ने सा रोजे के कायदे सा जाप नाम सा एक शख्स जो मुझमें मुझसे ज्यादा सा।
By Deepak Malik

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