Dobara Ishq
By Anurag Nigam
चलो अब इश्क दोबारा करते हैं
अपने ही किस्से को अंजाम दोबारा करते हैं ....
तुम फिर से अपनी जुल्फों को सुखाने बाहर आना
मैं देखने तुम्हे फिर से सरेआम आऊंगा
तुम फिर से मुझे देखकर मुस्कुराना
मैं फिर से उन गीली जुल्फों पर गजल गाऊंगा
तुम एक बार फिर से शरमाना
देखते ही मुझे खुद को खुद के आंचल में छुपाना
डर से परे समाज के, खुलके मुझे बुलाना
बीती हुई मोहब्बत की एक बार फिर से शुरुवात करते हैं,
चलो अब इश्क दोबारा करते हैं
अपने ही किस्से को अंजाम......
तुम एक बार फिर से मुझे आशिक मिजाज कहना
सूट काला डालकर बदन पर मुझे खुद में मशरूफ करना
पहनकर झुमके बड़े कान पर, शरमा कर नजरें चुराना
तुम फिर से एक बार मेरे कपड़ो के रंग तय करना
मैं फिर से उन्हें पहनकर तुमसे प्यार मांगूंगा
सपनों को रात तले फिर से बुनते हैं
चलो अब इश्क दोबारा करते हैं
अपने ही किस्से को अंजाम दोबारा करते हैं ....
By Anurag Nigam

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