Dhadkano ki awaj
By Asheshwar Saw
जितनी तेज सीने में धड़कता है यह दिल ये नजरें मंजिलों का दीदार किया करती हैं ।
जब तक रहता है जलता हुआ चिराग अंधेरा दूर रहता है।
खैरियत है अरमानों का घरौंदा महफूज है तोड़ती मरोडती इस जिंदगी की कश्ती पग पग निराशा का पहाड़ खड़ा करती है।
एक को हटाओ दूसरा चट्टान खड़ा करती हैं लहूलुहान करती है जीस्म जलाती है लाखों चोट खाने पर भी हुंकार भरना पड़ता है।
गौर से देखें दुनिया बेरंग है बेवफा है सिर्फ दर्द और गम का गोला छोड़ने को आतुर है।
उछल कूद चीख-पुकार बेवजह मचा है चारों ओर कोई पूछ लेता है जुबान से हाल-चाल चंचल सी तितली की गति लेकर यह इंसान चलता है ।
By Asheshwar Saw

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