Dear ज़िंदगी
By Poonam
Dear ज़िंदगी, यूँ तो तेरे नाम कई हैं
लेकिन तुझे पहचानूं किससे
ये समझ नहीं आता
अक्सर ये सवाल उठता है मन में मेरे
कि तुझे जीना है या समझना है
Dear ज़िंदगी, तू ही ये बता दे
कि मैं करूँ क्या
आज में रहकर जिऊं
और जो रास्ता सामने दिखे
उसके hurdles को पार करके
बस आगे बढ़ती ही चली जाऊँ
या फ़िर…
या फ़िर अतीत के पन्नों को पलटकर देखूँ
देखूँ उन यादों और लम्हों को
जिन्हें देख कभी ख़ुशी से चेहरा चमक उठता है
तो कभी ये आँखें नम हो जाती हैं
और फ़िर मैं सोचती हूँ
अतीत की दूर तक फैली उस चादर के बारे में
जो आज के हर एक लम्हे को भी
खुद में समेट ले जाती है
जो आज यहाँ है
वो कल तो नज़र आएगा नहीं
धीरे-धीरे ये वक़्त भी
बादल बन उड़ जाएगा कहीं
Dear ज़िंदगी, यूँ तो तुझसे यारी निभाना आसान नहीं है
लेकिन मुश्किलों के आगे घुटने टिकाना भी तो हमें आता नहीं है
तो फ़िर चल
आज में ही रहकर
कुछ और पल जीते हैं
नयी यादें बनाते हैं
और तुझे हसीन लम्हों से सजाते हैं
तेरे अनगिनत नामों की फ़ेहरिस्त को
और आगे बढ़ाते हैं
कोई कहता है तू संघर्ष है
तो कोई कहता है हर कदम पर तू एक नई जंग है
But just to remind you
तेरा सामना करने के लिए मेरा हौसला मेरे संग है l
By Poonam

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