Covid aur manodasha
By Deepak Malik
कब तक यूं बंद कमरे में दुनिया अलग का ख्वाब बुनते रहोगे तुम। बाहर निकल, दुनिया का रंग असली देख क्यूं नहीं लेते तुम। उड़ते परिंदे, महकते फूल सरसराती हवा, बहता पानी नीला आसमां एक ओर ढलता सूरज दूजी ओर
सब तो यूं करीब करीब से हैं हाथ बढ़ा आगे पकड़ क्यूं नहीं लेते तुम। बेपरवाह से हैं लोग यहां बेफुर्सत सी है शाम यहां किस को तलब की सोचे तुझको जब सांसे ही नशे में हो यहां बेफिक्र सी फकीरी अपनी ओढ़ क्यूं नहीं लेते तुम । दुनिया के रंग असली, देख क्यूं नहीं लेते तुम ।।
By Deepak Malik

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