Corona
By Sunil Kumar Shukla
व्याप्त है विपदा विकट वसुधा बड़ी बेहाल है,
व्याधि है सुरसा सदृश स्थिति बड़ी विकराल है !
नत सभी सामर्थ्य पापी कृत्य जनित विषाणु से,
चीन के वुहान से निकला ये कैसा काल है !!
त्रस्त है संसार भय आक्रांत हैं मानव सभी,
कोप यह यमराज का थमता नहीं दिखता अभी !
यह विनाशक सृष्टि नाशक सूक्ष्म अति अविकार है,
पस्त है सारा जगत चहुँओर हाहाकार है !
फैलता ही जा रहा कैसा विकट यह जाल है !
चीन के वुहान से निकला ये कैसा काल है... !!
है कोइ यह आपदा अथवा प्रकृति का क्रोध है,
तुम त्वरित रोंको इसे विधिना यही अनुरोध है !
भूल मानव से हुई वांछित क्षमा का दान है,
मूढ़ अज्ञानी सही फिर भी तेरी सन्तान है !
देख हर प्राणी तेरा बेहाल है बदहाल है !
चीन के वुहान से निकला ये कैसा काल है.. !!
जग भयातुर है बहुत निशिता बड़ी घनघोर है,
हर तरफ छायी निराशा बेबसी का शोर है !
क्लांत कर इस त्रासदी को तू प्रभा विस्तार दे,
कर अलौकिक कृत्य कुछ हर आस को तूँ प्राण दे !
दिग्भ्रमित दिखता समय अवरुद्ध उसकी चाल है !
चीन के वुहान से निकला ये कैसा काल है..!!
विघ्नहर्ता न्यायकर्ता तू ही पालनहार है,
है भँवर में नाव हाँथों में तेरे पतवार है !
तू ही माझी है यहाँ जब तू ही खेवनहार है,
फिर भला डूबेगी कैसे नाव जो मझधार है !
तुम उबारो यह जगत जिस पर कोरोना काल है !
चीन के वुहान से निकला ये कैसा काल है..!!
By Sunil Kumar Shukla

Comments