Chalte Fasle
Updated: Sep 3, 2025
By Nidhi
चलते फासले
हम तो चले थे अपने आप को पाने ,मगर खुद को यादो में ही छोड आऐ।
पाना था मुकाम खुशी यो का, मगर नजारा दिखा धुनधला सा।
चड तो गए तरक्की की सिडी ,भुख : लगी तो, खाना बाट ने को कोइ नहीं।
अकेला नहीं पहुंचा मुकाम पे ,थे हजारो मेरे सात, कदर नहीं की और टेस पहुंचा दो उनके मन को।
इस दोड में अब जब सब कुछ है, तो कोई सुख: बाटने को नहीं।
क्या उमीद रखु दुसरो से , जब मेरे पास साँस लेने की फुरस्त नहीं।
आज आसमान में होकर दुनिया छोटी नजर आती है, मगर हक्कीकत तो यह है की में छोटा बनगया हूँ, दुनिया की नजरों में।
By Nidhi

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