Chahato ka silsila
By Rashmi Ray
अगर सोचूँ तो सारी उमर मोहब्बत में गुजर गई,
अगर देखूँ तो एक शख़्स भी हमारा नहीं हुआ!
अगर सोचूँ तो हर रात सपनों में बीती,
अगर देखूँ तो एक ख़्वाब भी हमारा नहीं हुआ!
अगर सोचूँ तो हर लम्हा साथ रहा कोई,
अगर देखूँ तो किसी का साथ भी गवारा नहीं हुआ!
अगर सोचूँ तो हर वक़्त राह में था कोई हमसफ़र,
अगर देखूँ तो एक भी मुसाफ़िर हमारा नहीं हुआ!
अगर लिखूँ तो कई क़िस्से हैं ज़िंदगी में,
अगर सोचूँ तो एक किरदार भी हमारा नहीं हुआ!
अगर सोचूँ तो चाहतों का सिलसिला रहा उम्रभर,
अगर देखूँ तो इश्क़ कभी हमे गवारा नहीं हुआ!
Inspired by Jaun Elia!
By Rashmi Ray

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