Bitiya or Chand
By Bhagat singh
बिटिया ने जब
चाँद को ताका
चाँद थमा
पत्तों से झाँका
चाँद अकेला
दूध सा गोला
तकती आँखों
से यूं बोला
स्वपन सलोने
सदा संजोना
तय करना
जग का हर कोना
आसमान की
ओर निहारे
आगे चलती बिटिया
पीछे चाँद चले
बिटिया माने
चाँद है उसका
बस उसके
चलने से ही
तो चाँद चले
चाँद की चिड़ियाँ
सदा घूमती
सागर की लहरों
को दूर से
लगा गले
लहरें आए जाए
गुरुत्व से
बिटिया के पैरों पर
मोती सीप मले
एक दिन बिटिया
चाँद पे बैठी
नारंगी धरती को
देख मुस्काएगी
उछल उछलकर
चाँद पे चल
धरती पर भी एक
चाँद का टुकड़ा
लाएगी॥
By Bhagat singh

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