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Beraham Duniya

By Riyaj Attar


ये दुनिया है बडी बेरहम

और ये दुनियावाले बेशरम


सच को सुननेवाला यहाँ पर कोई नही

पर झूठे मक्कार मिलेंगे यहाँ हर कदम

ईमानदारीकी आग कबकी ठंडी हो गई

भ्रष्टाचारका ही लोहा हर तरफ है गरम


ईन्सानियतका नामो निशान कही नही

ये दौलत ही है अब हर किसीका धरम

मान सन्मान के तो मायनेही बदल गए

ज्यादा गुनाह याने ज्यादा अच्छे करम





पढ लिखकर तो ईन्सान आगे बढ गया

जूल्मने भी ना रुकनेकी खाई हो कसम

यहाँ धरतीपे रहके चाँदतक को छु आया

गरीब पडोसीके हालातपे न आया रहम


ना लोग सीधे है और ना जिंदगी है साधी

हर कोई नीभा रहा है यहाँ अय्याशीकी रसम

शरमोहया कैद होके रह गई बस किताबोंमे

और बेशर्मी खुलेआम घुमे ना किसीको गम


खुदको खुदासे बडा समझे है यह ईन्सान

ऊफ पर हरकते ऊसकी शैतानोंसे ना कम

मौतभी हैरान है आजकल जिंदगीके रुखसे

जिंदगी खुद तोड रही है हरपल यहाँपे दम


ईनसे हमारा क्या वास्ता सबका है ये वहम

कुछ गलती तुम्हारी और कुछ गलत है हम

सचमुच यारों ये दुनिया है बडी बेरहम

और ये दुनियावाले ऊससे बडे बेशरम



By Riyaj Attar





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