BECHAIN MANN
By Karan Kaushik
नाराज़गी में भी ये मन तुम्हारी सलामती की दुआ करता है
मुझसे ज़्यादा तो ये तुमसे वफ़ा करता है
तुम्हारी ख़बर मिलने तक मुझसे ये सवाल करता है
जब देखो तुम्हारा इंतज़ार, ये भी क्या कमाल करता है।
बेचैन है पर पूछेगा नहीं
नाराज़ है तुमसे पर रूठेगा नहीं
इंतेज़ार करता रहेगा पर बताएगा नहीं
इसे इश्क़ तो है तुमसे पर ये जताएगा नहीं
पागल है ये मन मेरा
दुआ में हर पल तुम्हें याद करता है
तुम्हारी ख़बर जब तक नहीं मिल जाती
मेरा यूहीं ये जीना हराम करता है।
By Karan Kaushik

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