Bas zikr hoga
By Deepak Malik
वो ज़िक्र चाँद तारों का करेंगे तुम मिट्टी की हक़ीक़त याद रखना सपने उनके तेज रफ़्तार के होंगे तुम कदम दो चलने की हिम्मत रखना
वो बात बेशक मन की करेंगे तुम भूख अपनी ज़िंदा रखना वो सबूत काग़ज़ का माँगेंगे तुम ख़ुद के वजूद पर डटे रहना वो चंद बुलबुले हैं, आएँगे जाएँगे तुम निरंतर नदी सा बहते रहना “मैं” भले मानू की राम पुरूषोतम है मेरे पर तुम सर अल्लाह पर भी झुकाए रखना वो हुकूमत एक तरफ़ा चलाएँगे तुम मिल कर देश बनाए रखना तुम इंसानियत अपनी ज़िंदा रखना तुम खुद पर यक़ीन रखना..।
By Deepak Malik

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