मेरा परिचय
Updated: Jul 28, 2025
By Banarasi
इससे पहले आप पूंछे
मैं स्वयं बताता हूं।
टूटी फूटी लाइनों के जरिए
सुनो एक कविता सुनता हूं।
जो भी जिस जगह का हो
मैं वहां का हो जाता हूं।
क्योंकि भारत को अपना
मैं गांव बताता हूं।
जानना चाहते है मुझे लोग तो
पहचान बनारस बताता हूं।
अब आगे पूछेंगे नाम मेरा
तो नाम बनारसी बताता हूं।
पूछते हैं घर का हाल
तो धरती जैसी मां और आकाश जैसा बाप बताता हूं।
जब और भी कोई है पूंछे
तो एक बहन का प्यार और भाई का ख्याल बताता हूं।
पढ़ाई के बारे में पूछो तो
खुद को इंजीनियरिंग का छात्र बताता हूं।
अब क्या ही बताएं आपको
मैं खुद को खुद का एहसास बताता हूं।
इन कविताओं में बस इतना कहना चाहता हूं
कलम लेकर कागज पे शब्दों के जाल बनाता हूं।
हां! आप कह सकते है
मैं अपना भाव कह लेता हूं।
बाकी आप ही बताएं
मैं आपको क्या नजर आता हूं।
हो गया मेरा बहुत परिचय
अब मैं इस कविता पे पूर्ण विराम लगता हूं।।
By Banarasi

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