Azadi Ka Prem Geet
Updated: Aug 2, 2025
By Pooja Singh
है प्रेम निरर्थक पाने को,
कफन पड़ा है सजाने को!
आजादी का है बिगुल बजा,
देखो !एक दीवाना है चला ,मस्तक अपना कटवाने को!!
केसरिया रंग चढ़ा है गहरा,
देखो! चहूंओर लगा है पहरा!
हाथों में मेहंदी ना जंचती,
लहू से सींचा है हमने अपने आजादी की टोपी!!
नाम भले हो आजाद मेरा पर अभी भी अंत: गृह में जलता हूं,
नवनिर्माण तृषा में पल-पल लहू उबलता हूं!
मतवाला हूं दीवाना हूं,
बस युद्ध गीत मैं गाता हूं,
दुश्मन को रण में मैं वसुधा की धूल चखाता हूं!!
आजादी है मेरा प्रेम गीत,
माशुका मेरी भक्ति है!
कभी ना करूंगा मैं आत्मसमर्पण,
मेरी मिट्टी में इतनी शक्ति है!!
है प्रेम निरर्थक पाने को,
कफन पड़ा है सजाने को!
By Pooja Singh

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