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Anokha bandhan

By Kanchan Deora



रागिनी और राजा दोनों पडोसी थे रागिनी के माँ बाप नहीं थे और राजा अपने माँ बाप और अपनी ५ साल की बेटी इप्शिता के साथ रहता था। उसकी बीवी का देहांत हो चूका था, तो बेटी का पालन पोषण दादा दादी और राजा मिलके करते, हंसते खेलते परिवार में कभी कहीं इप्शिता की सूनी आँखें पढ़ ली थी रागिनी ने, जो हर वक़्त हर कहीं हर किसी में अपनी माँ की कमी को पूरा करने की कोशिश करती रहती थी, रोज सोसाइटी में आते जाते रागिनी उस नन्ही बच्ची से टकरा जाया करती और जब कभी किसी दिन इप्शिता रागिनी को नजर न आती तो रागिनी की आंखें उस बच्ची को हर कहीं तलाशती रहती, न जाने कौन सा बंधन था दोनों के बीच जो एक दूसरे की और खींची चली जा रही थी, एक दिन जब बिल्डिंग की लिफ्ट में अचानक लाइट जाने से घबराके इप्शिता की नन्ही उंगलिओ ने जब रागिनी का हाथ थाम लिया था तो रागिनी ने उसे गले से लगाते हुए दिलासा दिया था , "अभी शरू हो जाएगी लिफ्ट बेटा।" उस दिन उस बच्ची को घबराहट में रागिनी के गले में बांहे डाले, डर से आंखें बंद किए देख रागिनी का हृदय ममता से भर आया था।





कुछ दिन बाद पार्क में खेलते वक़्त वो अपनी दादी के साथ मिली थी, इप्शिता दादी माँ के पीछे छुपी लगातार रागिनी को देखे जा रही थी और रागिनी भी उसकी दादी से बात करते करते इप्शिता को देख के मुस्करा देती। पहली नजर में बच्ची से रागिनी को लगाव सा हो गया था, तो बातों बातों में उसकी दादी ने बताया था क्योंकि वो लोग मीड सेशन में वहां शिफ्ट हुए हैं तो एडमिशन नहीं हो पाया था अभी कहीं भी इप्शिता का। तो वो इप्शिता के लिए ट्यूशन के लिए पूछने लगी थी, तभी रागिनी ने बोला "आंटी ट्यूशन तो नहीं पढ़ा पाउंगी लेकिन अगर आप चाहे तो मै ऐसे ही पढ़ा दूगी।" इप्शिता की दादी ने शुक्रिया किया और अगले दिन से पढ़ाने को बोल दिया, इप्शिता के आने से रागिनी के जीवन में जो खालीपन था जैसे भर सा गया हो और इप्शिता को भी उसकी माँ मिल गयी थी, जिसने उसे पैदा तो नहीं किया पर उसकी ममता उतनी ही सच्ची थी जितनी एक माँ की ममता अपने बच्चे के लिए होती है। ऐसे ही साथ हँसते हंसाते दो साल बीत गए। इस बीच कहीं न कहीं इप्शिता के पिता को रागिनी के प्रति प्रेम या कहें तो आकर्षण होने लगा था, तो राजा ने अपनी माँ से रागिनी के साथ शादी की बात चलाने को कहा। रागिनी का कोई अपना तो था नहीं, तो रागिनी को भी सहारा मिल जाएगा ये सोच के सभी इस बात पे राजी हो गए थे, तो समय बीत रहा था एक दिन ऐसे ही बातों बातों में पता लगा की आंटी इप्शिता को शादी के बाद अपने साथ ही रखेगी,क्योंकि सौतेली माँ सौतेली ही होती है सो वो इप्शिता को किसी को नहीं देंगी.. ये बात रागिनी को चुभ गयी थी। वो तो शादी करना ही नहीं चाहती थी, सिर्फ इप्शिता का मोह था जो उसे इस परिवार से बांधे हुए था, अब जब वो ही साथ नहीं होगी तो फिर वो कैसे रहेगी इस परिवार में, तब रागिनी ने आंटी को बोला "आपको लगता है कि शादी के बाद मै सौतेली माँ बन के रह जाउंगी, तो आंटी अब ऐसा कभी नहीं होगा मै उसकी माँ हूँ और अब से मै सिर्फ उसकी माँ ही रहूगी और ये बंधन दिल से है जिसे कभी कोई नहीं तोड़ पाएगा जब कभी उसे मेरी जरुरत होगी मै हमेशा उसके साथ होगी एक माँ की तरह दूर रह के भी हमेशा मेरा प्यार और आशीर्वाद हमेशा उसके साथ रहेगा", ये कहके रागिनी ने वो शहर छोड़ दिया. आज भी वो फेसबुक के जरिये अपनी बच्ची को देखती है बड़े होते हुए, दोस्तों के साथ हँसते खेलते हुए और इप्शिता भी अपनी माँ का हर रोज रात को वीडियो कॉल पे आने का इंतज़ार करती और दिन भर की सारी बातें बताती है। हर साल अपने जन्मदिन के गिफ्ट्स की लिस्ट वो अपनी माँ को भेजती और छोटे बड़े डीशिजन में अपनी माँ से रागिनी से राय लेती। उनके इस रिश्ते को कोई नहीं तोड़ पाया जो बंधा था उनके दिलों में। रागिनी आज भी हर रोज बात करती है इप्शिता से और ये कहना कभी नहीं भूलती की, "तुम हमेशा मेरे दिल में रहोगी मेरी बच्ची इप्शिता"।



By Kanchan Deora




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