Ahemiyat
By Kavish
अलफ़ाज़ नहीं समझोगे उनके,
तो ख़ामोशी को क्या समझोगे,
उनके होठों पे जो झूठी हसीं है,
कब तक उसे नज़र अंदाज़ करोगे?
तो क्या हुआ वो खुद कुछ बताते नहीं,
तुम उनसे बात करके अपना हक्क जताते भी तो नहीं,
जब भी होगी परेशानी, ढूँढ़ते हुए उनके पास जाओगे,
अपने दुखड़े सुनाके, तुम फिर उन्हें भूल जाओगे!
क्या पता कब हो उनसे तुम्हारी आखरी मुलाक़ात,
फिर याद आयेगी उनकी वो हर कही हुई बात,
चाह कर भी नहीं देख पाओगे उन्हें,
बस याद रहेगी तो उनके यादों की वो मीठी याद!
By Kavish

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