Adhura Ishq
Updated: Jul 19, 2025
By Parin Chheda
वह बेइंतेहा खास था
या कोई आभास था?
यह इश्क़ की कहानी बड़ी अजीब है यारा,
क्यों तू ही है सबसे प्यारा?
दिन रात गुजारे, लेकर तेरे चेहरे का सहारा,
जब मिला तुझसे, तो खिलता हर पल बहारा।
फिर भी एक अनजान सी लग रही है दूरी,
तुम उसे बताती रही अपनी मजबूरी
बहुत पेचीदा है मेरे दिल का हाल,
एक तेरी ख़ामोशी, सामने मेरे लाखों सवाल।
यह कैसी बेबुनियाद आरज़ू?
यह कैसा दो दिलों का नाता?
जो कभी पा ना सके,
दिल उसी को खोना नहीं चाहता।
वह जो मेरे दिल के क़रीब था
न जाने लिखा किसके नसीब में था?
आखिर कल रात मेरी आंखों ने ही थक कर कह दिया
की सुनो ख़्वाब ऐसे देखो यारा,
जिन्हें पूरा होने का हो इरादा
ऐसे रोज़ - रोज़ हमसे रोया नहीं जाता।
इसलिए कई बार सोचता हूं
की क्या वह सच में बेइंतेहा खास था,
या फिर मेरे मासूम से दिल का आभास था?
By Parin Chheda

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