top of page

Ab Tote Bhi Jhoot Bolne Lage

Nov 5, 2022
2 min read

By Aqeel Agaz


सुबह उठा तो कुछ अजीब सी आवाजे मेरे कानों से टकराई. मैने अपने आपको टटोला और पाया कि शरीर का हर अंग अपनी जगह फिट था. दिल पूर्व की भांति अपने गमों से कम दूसरों की खुशियों से अधिक दुखी था. मस्तिष्क खुराफातों से लबरेज साजिशें बुनने का सामान्य काम कर रहा था. आखें फैशन वॉक की समाप्ति की तस्वीरों में नए परिधानों को नजरअंदाज करते हुए उन्हें पहनकर इतराती हुई बालाओं द्वारा उत्तेजक मुद्राओं में अंग प्रदर्शन की दावत स्वीकार करते हुए इनके अर्धनग्न शरीर को ताके जा रही थी.




आदत के तहत कानों को दूसरों की बुराई सुनने में वैसे ही मजा आ रहा था जैसे सदैव आता था. जब सब कुछ सामान्य है तो फिर असामान्य क्या हो रहा है? मैं इस भेद को जानने की कोशिश कर ही रहा था कि मुंडेर पर बैठे कौवे की कांव कांव ने मुझे ज्ञान दिया कि मुझमें जानवरों की बोली समझने की कला विकसित हो गई है.

एक कौवा मुझसे पूछ रहा था तुम्हारी संसद में जनप्रतिनिधि दागी, बागी, भ्रष्टाचारी, बहुबली व घोटालों पर भ्रष्ट अधिकारी के कारनामों पर हमारी तरह कांव कांव तो बहुत करते हैं. मगर हमारी तरह एकजुट होकर उन्हें बाहर का रास्ता दिखाने की हिम्मत कोई नहीं करता? ऐसा क्यों है. यह उनसे पूछकर हमें बताओ. कौवे के इस संदेश को पहुँचाने की ईमानदाराना कोशिश करते हुए मैं सत्‍तारूढ़ दल के एक बड़े नेता के घर पहुँचा और आमजन की कतार में बैठ गया. बहुत देर बाद उनके पीए ने आकर कहा कि साहब बहुत व्यस्त है इसलिए आज किसी से नहीं मिलेंगे. भीड़ छंट गई मैं पीए के पास गया और कान में कहा- एक डील फाईनल करना है पीए साहब. इसलिए मुझे तुरंत नैताजी से मिला दीजिए. अगर यह डील फाईनल नहीं हुई तो इससे मेरा नुकसान है और नेताजी का भी. यह सुनकर पीए के चेहरे पर मुस्कान आई. उसने मुझे ऊपर से नीचे तक देखा. माजरा उसकी कुछ समझ में नहीं आ रहा था. फिर कान के पास मुंह लाया और मुझे टटोलते हुए कहा कि सूटकेस कहां है? मैंने कहा कि मेरे पास सूटकेस तो नहीं पर उससे भी कीमती कुछ चीजें हैं. मेरा यह कहना था कि वह मुझे एक कमरे में ले गया, जहाँ नेताजी का तोता चहक रहा था. मैं उससे बतयाने लगा. यह नेताजी के बारे में मेरे सामान्य ज्ञान में वृद्धि कर रहा था. ऐसी ऐसी बातें बता रहा था जो कोई नहीं जानता था.

पावरफुल नेता मुझे तोते से घुल-मिलकर बातें करता देख सकपकाते हुए बमुश्किल यह कह पाया कि इस तोते की बातों पर यकीन मत करना यह बहुत झूठा है. मैं गर्दन झुकाए कमरे से बाहर निकल आया, कयोंकि मुझे कौवे के प्रश्न का उत्तर मिल गया था. एक ही प्रश्न के कई उत्तर मिले थे और अब तक सोच रहा हूँ कि तोते की उन बातों का यकीन करूँ, जो नेताजी के बारे में उसने कही है या फिर नेताजी की बात मान ली जाए कि तोता झूठ बोल रहा है. हो सकता है कि उनकी संगत का असर तोते पर हो गया हो.


By Aqeel Agaz





Recent Posts

See All
Kannikonna

By Deepa Santosh കേരളത്തിന്റെ ഔദ്യോഗിക പുഷ്പമായ കണിക്കൊന്നയുടെ ദർശനവും സ്പർശനവും സൂക്ഷ്മമായപ്പോൾ അവളിൽ അന്തർലീനമായ നിരവധി ഭാവങ്ങൾ ചിറകുവിടർത്തി... നവനീതചോരന്റെ നറുപുഷ്പവും നവരസങ്ങളും കാർമ

 
 
 

Comments

Rated 0 out of 5 stars.
No ratings yet

Add a rating
bottom of page