Aankhein
- Hashtag Kalakar
- Dec 1
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By Arshi Srivastava
आंखें – दिल का हाल बोल दें,
आंखें – शर्म का राज खोल दें,
ना चाहकर भी वो हुए बख़बर,
सब कुछ बयां कर देती है नज़र।
आंखें – नूर सी चमकती हैं,
आंखें – जाने क्यों बहकती हैं,
किसी की अदाओं का हुआ इनपे असर,
सब कुछ बयां कर देती है नज़र।
आंखें – इशारों पे नचा दें,
आंखें – मोहब्बत की सज़ा दें,
कैसे बीतते हैं अब चारों पहर,
सब कुछ बयां कर देती है नज़र।
आंखें – झुक कर हामी भर दें,
आंखें – जाने कब शरारत कर दें,
मुकाम पा कर भी शुरू हुआ सफ़र,
सब कुछ बयां कर देती है नज़र।
आंखें – पल में अपना बना लें,
आंखें – रिस्तों से रिश्ते चुरा लें,
महफ़ूज़ है इनमें इनका हमसफर,
सब कुछ बयां कर देती है नज़र।
By Arshi Srivastava

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