होली
By Arpita Yadav
जिस भारतीय पावन त्योहार पर,
घर-घर की चौखट पर बनती है रंगोली,
भारतीय संस्कृति में मनाए जाने वाले,
इस त्यौहार का नाम है होली ।
जैसे सूरज के बिना नहीं होता है दिन,
वैसे ही होली का त्योहार अधूरा है रंगों के बिन।
फाल्गुन के माह का यह त्यौहार,
रंग और उमंग की चाह का यह त्यौहार,
खुशियों की स्याह का यह त्यौहार,
जहाँ पर राग के साथ है रागिनी का सार,
भारत की स्वर्ण धरा पर,
मनाया जाता है यह पावन त्यौहार।
पाना है ईश्वर को, तो दुनिया से रिश्ते तोड़ लो।
और अगर जानना है भारतीय संस्कृति को,
तो वेदों और पुराणों से नाते जोड़ लो।
सुन तो होगा ही आपने,
प्रहलाद की व्यथा के बारे में।
चलो आज थोड़ा जानते हैं,
होली के पीछे छिपी पौराणिक कथा के बारे में।
युग तो याद नहीं,
पर योगी याद है। भगवान विष्णु की भक्ति में बना, प्रहलाद नमक जोगी याद है।
हर बात में जिसकी ज़िक्र ईश्वर का,
हर सांस में जिसकी फिक्र ईश्वर का,
पुत्र प्रहलाद की भक्ति,
पिता हिरण्यकश्यप को ना भाई।
खत्म करने हेतु पुत्र को ,
पिता ने अनेक साजिशें रचाई।
तंग देख भाई को,
फिर बहन होलिका आई।
अग्नि देव से प्राप्त वरदान को,
प्रहलाद के लिए अभिशाप बनाया,
भस्म करने हेतु प्रहलाद को ,
खुद के संग अग्निकुंड में बिठाया।
फिर प्रह्लाद ने मन में ,
ईश्वर का जप गाया। भगवान विष्णु का तब,
नरसिम्ह अवतार प्रकट हो आया।
पापियों को देखकर फिर उनकी सजा, कुछ ऐसी ईश्वर की शक्ति ने,
भक्त को बचाया। तब से हमने होली के त्यौहार में,
है होलिका को जलाया।
By Arpita Yadav

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