साथी
By Sushant Saurabh
एक बात पूछूं
जवाब दोगे?
रात के दूसरे पहर
सबके सो जाने पर
दीवारों को जब घूरते हो
चुपचाप
अकेले
क्या वो तुमसे बातें करते हैं?
काटियों से कुरेदी बदन
जब वो तुमको दिखलाते हैं
अलग - अलग थिगलियाँ
जब एक साथ चिल्लाते हैं
सुनते हो न?
कल दोपहर जब सबके साथ बैठे थे
तुम थे तो वहीं, पर थे नहीं
बाहर तो हंस लेते हो
घाव अपना ढक लेते हो
पर ये नकाब कब तक पहनोगे
उतार दो
आओ बातें करते हैं
कुछ कहते हैं
कुछ सुनते हैं
तुम्हारे साथी भी है शिविर में
अकेले नहीं हो तुम तिमिर में
जानते हो न?
By Sushant Saurabh

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