सपने
By Amit Mohan Singh
आगे बढ़ना चाहता हूँ
कुछ बड़ा करना चाहता हूँ,
इन आँखों ने कुछ सपने देखें हैं
उन सपनों को पूरा करना चाहता हूँ
माँ बाप को अब आराम देना चाहता हूँ
उनका नाम रोशन करना चाहता हूँ
मेरे नाम से वो पहचाने जाएँ
ऐसा काम करना चाहता हूँ,
आगे बढ़ना चाहता हूँ
कुछ बड़ा करना चाहता हूँ,
अच्छा बुरा जैसा भी था
हमेशा वो मेरे साथ थे,
अब मैं भी उनका साथ देना चाहता हूँ,
बचपन में उनकी ऊँगली पकड़के मैंने चलना सीखा था
अब बुढ़ापे में मैं उनकी छड़ी बनकर पूरी दुनिया घूमना चाहता हूँ,
आगे बढ़ना चाहता हूँ
कुछ बड़ा करना चाहता हूँ,
पैसा रुपया मकान सब एक तरफ
बस लोगों का प्यार कमाना चाहता हूँ,
लोग मुझे मेरे नाम से नहीं काम से जाने
ऐसा कुछ करना चाहता हूँ,
सच कहता हूँ,
आगे बढ़ना चाहता हूँ
कुछ बड़ा करना चाहता हूँ I
By Amit Mohan Singh

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