सपना
By Akash Tiwari
खुले आसमान के नीचे
चाँद सितारों के बीच में
वो मुझे देख रही
मै उसे देख रहा
इस रात की ख़ामोशी में
कह रही वो कुछ मेरे कानो में
ना जाने क्या कह गए वो ऐसा
जिसे सुन अँधेरे में भी मैं चमक उठा सूरज जैसा
पकड़ लिया मैंने उसके हाथो को
महसूस किया आज मैंने उसकी सांसो को
थी वो मेरे इतने पास में
सुन लिया मैंने खुद को उसकी धडकनों में
बस पूरी रात बीत गयी इन्ही ख्यालो में
सुबह टूट गया मेरा ये सपना जो था
उसे तो सिर्फ मेरे ख्यालों में ही रहना था
By Akash Tiwari

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