शायद
Updated: Jul 5, 2025
By Sarthak Gupta
तुम अगर गले लगाकर,
पूछ लोगे हाल मेरा,
तो शायद इन ज़ख्मों से,
मिल जाए मुझे राहत।
जो बात लफ़्ज़ों में ना कह पाऊँ,
दिल की धड़कने ही उसको,
तुम तक ले आए शायद।
हो ना पाऊँगा आज़ाद में,
कभी इन ख़यालों के जंजाल से,
पर एक बार मेरा हाथ थाम के तो देखो,
शायद में उड़ान भरपाऊ इस खुले आसमान में।
By Sarthak Gupta

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