वक़्त
By Shubham Kabra
ये वक़्त जो अभी हाथों से, यूँ ही निकल रहा है,
आने वाले वक़्त में , ये भी याद आएगा |
कभी होठों पे मुस्कान , कभी आँखों में नमीं,
कभी खुद पर नाज़, तो कभी खुद से शिकवा करा जायेगा |
क्या बाद में इस वक़्त को याद करना जरुरी है,
क्यों न इस वक़्त को, आज अभी पूरा जी लें |
इस वक़्त को हाथ में थामकर तो नहीं रख सकता,
पर इस वक़्त से, आने वाले वक़्त को, बना जरूर सकता हूँ |
आईने में खड़े उस इंसान से रूबरू होकर,
उसके हर सवाल का जवाब जरूर सकता हूँ |
ऐ वक़्त, अगर तू मेरा साथ दे,
तो हर दिल में अपनी जगह बना कर, रह जरूर सकता हूँ |
By Shubham Kabra

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