वक़्त
Updated: Jul 16, 2025
By Nandlal Kumar
वक़्त की आँख में
कितना बड़ा मोतियाबिंद है !
इसे कुछ सूझता ही नहीं।
भूख से मौतें हो रही हैं
उधर सैनिकों की माएँ रो रही हैं
बेरोजगारी का ये आलम है कि
अब सभी खपरैलों से धुआँ
रोज नहीं निकलता।
मगर वक़्त है कि
हमारा ध्यान भटका देता है
टीवी पर कभी मिसाइल तो कभी
तोप दिखा देता है ।
ओ स्वराज के दीवानो
लंबे रियलिटी शो और क्रिकेट देखकर
तुम्हें स्वराज नहीं मिलेगा
उठो ....जागो ....
वक़्त की आँख का मोतियाबिंद हटाओ
ताकि वो तुम्हारे घर के
खाली बर्तनों को देख सके।
तुम्हारे पेट में आग
और आँख में पानी है
फिर भी जवानी तो जवानी है ।
इसे व्यर्थ न जाने दो ।
और हाँ,
मुझसे ये मत पूछना कि
ये वक़्त कौन है ?
By Nandlal Kumar

Comments