वक्त
Updated: Jul 18, 2025
By Dr. Devendra K Prajapati
वक्त ने वक्त को मारा होगा,
वक्त भी वक्त से हारा होगा।
वो क्यों न इतराए अपने वक्त के चादर में,
उसने भी चादर बिना वो वक्त गुजारा होगा।
देख कर भी अनदेखा क्यों न करता,
यकीनन वक्त ने उनको सहलाया होगा।
हर बार वो विलोम को पूरक कहता है,
मेरा दावा है उसे विलोम समझ न आया होगा।
हर जगह इतने कैमरे क्यों न लगाता,
जरूर कोई चोर नजर आया होगा।
शाम ने भी जल्दी पलकें झुका ली,
फिर कोई अपने घर जल्दी आया होगा।
पेशानी का दाग़ मध्यम सा बचा है,
खुशी है घाव अंदर से भर आया होगा।
By Dr. Devendra K Prajapati

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