वक्त
By Parul Bhargava
अजब सी जंग है छिड़ी दोनों में आज
वक़्त कर बैठा जिरह यादों के साथ
अनवरत चलते रहने का गुमान
वक़्त को था कुछ इस क़दर
समझ ना सका वो कि
कुछ लम्हें रहते हैं बेअसर
यादों की गिरहें खुलती देख
थम कर बैठ गया वक़्त वहीं
सोचने लगा,मैं तो सदा चलता रहा आगे
सहेजा एक पल भी नहीं....
यादें तो सदा से ही थीं पीछे मेरे
छोटे छोटे पलों को थी वो घेरे
जाने कब,निकल गयी वो मुझसे आगे
और मैं बीतता चला गया यूँ ही बिन रुके
यादें ,लम्हों को बाँधकर रखती हैं
सभी के दिलों में कहीं
आज वक़्त की जेब में देने को
कुछ था ही नहीं
सच ही तो है......
"होती है जब भी यादों से जिरह
वक़्त अक्सर हार ही जाता है ।।"
By Parul Bhargava

Comments