रावण
By Jeeshant mathur
कहते हैं अहंकार था तुझमे रावण फिर अहंकार कहा तू गिरा आया,
राम सेतू पुल के हेतू हवन था तूने करवाया,
उठाया हाथो से कैलाश को महादेव का पूजापाठ किया
खुद की नसों के कोलाहल से शिव तांडव इजात किया,
अमृत पाने को ब्रह्मा से खुद का ही सर काट दिया,
तब ब्रह्मा ने वरदान दिया, तेरे एक सर को दस में बाँट दिया
राक्षस राजा मरते मरते तूने उसे कूटनीति बाटी थी,
जिसने गुस्से में आकर तेरी बहन कि नाक काटी थी,
मेघनाथ के जन्म हेतू तूने नक्षत्रो में भी भेध किया,
शनि ना माने तो तूने उनहे कारावास में कैद किया,
दरबान थे तुम विष्णु के, इसलिए तुमने अवतार लिया,
मोक्ष पाने को प्रभु के हातो,नारायण ने संघार किया,
कहा कि नीति हैं कि एक स्त्री के लिए दूसरी को मात दो,
ओरत पर हाथ उठाना कायरता हैं तो कायरता को क्यु रूप विराट दो,
हर हालत में हर हालात में हमारे साथ चले जाती हैं,
फिर नील से क्यु भरी हुई उसकी गर्दन कमर और छाती हैं,
छोटी छोटी बातो पर फतवा निकाल देते हो,
छोटी छोटी बच्चीयो को धूद में उबाल देते हो,
सीता तो फिर भी वाटिका में थी उसे थोड़ा तो आराम था,
यहा कौन सी वाटिका हैं यहाँ हर कोशिश का फल नाकाम था
इस युग में ऐसा दोर हैं,
हर तरफ चीखे हैं शोर हैं,
इस दोर में राक्षसो से लड़की को पहरेदारी नहीं हैं,
जलने देते हैं एक लड़की को कहरक बहन हमारी नहीं हैं,
काश इस युग में फिर रावण आऐ जोह इन सबके विरुद्ध हो,
फिर लेकर उतरे राम का नाम हम,फिर एक बहन की खातिर युद्ध हो।
By Jeeshant mathur

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