रचना
- Hashtag Kalakar
- Dec 12, 2025
- 1 min read
By Varsha Rani
ज़िन्दगी खुशियों से भरी मचलती रही,
शब्दों का भाव और
रंगों का जाल फेंक कर हमें लुभाती रही I
मैंने शब्दों को बुना,
तुमने रंगों को चुना,
न कूँची ने तुम्हारे रंग बिखेरे,
न शब्दों ने मेरे भाव उकेरे,
हम दो दिग्गज कलाकार,
लेकिन एक दूजे से बेज़ार,
लेखा-जोखा ही बस करते रहे,
क्या पाया क्या खोया, बस यही सिर धुनते रहे,
रहना था फिर कोरा पन्ना,
मन से जब मन ही मिला ना,
रह गए साथ-साथ चलते हुए,
रेल की पटरियों से अकेले-अकेले I
By Varsha Rani

Comments