यौवन.....
By Aryawardhan Garg ( kajal )
मैं तो उलझा था , उलझनों के पहाड़ों में.....
गुम हो चला था , यौवन , के सितारों में.....।
गलतफहमियों के रातों का हो रहा है जब सबेरा....
टिमटिमाते सितारों का यूं बस रातों में ही होता है बसेरा....।।
गुरुर था और था गुमान अपने यौवन के सितारों पर...
सुबह होते ही सब के सब गुम हुए जो थे कतारों पर...।।
यौवन में बड़ी होती है शक्ति रे बड़ी मंजूम....
प्रेमिका के लिए चलदेते है ये जलती अंगारों में....।।
By Aryawardhan Garg ( kajal )

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