मिलन
By K Ggsri
रोज़ तारों में, तलाशूँ तुझको,
चंदा भी राह, दिखलाये मुझको।
राह में हैं, बाधाएँ अनेक,
बढाऊँ कदम, धड़कन संग हरेक।
रोशनी चंदा की, धरा पर गिरती,
तेरी याद में, पागल मैं फिरती।
यादों में मिलता, सुकून सा एक,
उस सुकून में व्यतीत करूँ, पल प्रत्येक।
किताब मिली, इश्क़ पर एक,
पढ़ा उसका, पन्ना प्रत्येक।
समझ न पायी, कोई शब्द सा एक,
देखूँ तालाब में, लिए ख्याल अनेक।
तालाब में दिखी, एक परछाई,
दिल में मेरे, छवी तेरी छाई।
समझ मैं गयी, बात पुरानी,
रब मेरा तू, मैं तेरी रानी।
रब को रानी, सुनाए एक कहानी,
इश्क़ पढ़ा मैंने, हुई मैं सियानी।
देह हैं दो, पर रूह है एक,
तेरे मेरे मिलन से मानो, जगत का हुआ सुर ताल एक।
By K Ggsri

Great poem
Beautiful emotionally connecting poem
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