माना..
By Shefali Agarwal
माना मेरी शामें सिर्फ़ मेरी न होंगी अब,
पर तुम कभी तो साझी करोगे न !
माना अब मैं सिर्फ़ मैं न रहूँगी,
पर तुम कभी तो मुझसे मन राज़ी करोगे न !
माना अब कागज़ों पर नाम केवल तुम्हारा न होगा,
पर उन भीगे पन्नों को पास रखोगे न !
माना कभी मैं ज़िक्र न भी करूँ अब,
पर तुम उन बातों को याद रखोगे न !
By Shefali Agarwal

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