ममता
By Mrinalini Gajbe
समुद्र से विशाल दिल ,
धरती से विशाल ममता ,
अंबर से विशाल आँचल,
आधार विशाल संसार का ,
अनुपम है माँ की रचना !
निश्चल प्रेम की परिभाषा ,
कठोर परिश्रम की तपास्या,
जीवन भर की आराधना !
नन्हे मन की अभिलाषा !!
अनुपम है माँ की रचना !
व्योम में छाया अनुपम प्रकाश ,
तिमिर तम अंधकार में रजनीश,
पुष्कर में खिला मृणाल,
उपवन में साजे गुलाब ,
अनुपम है माँ की रचना !
कम है सभी अलंकार ,
ईश्वर का हो पुरस्कार,
नन्दलाल की यशोमती ,
जीवन हो यदा सुखी !!
अनुपम है माँ की रचना !
By Mrinalini Gajb

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