बचपन
By Suman Rai
बचपन
पहले वाला बच्चा अब क्यूँ नहीं दिखता,
मासूम भोला-भाला बच्चा अब क्यूँ नहीं दिखता,
दादाजी की उँगली पकड़,
दादी के पल्लू में जकड़,
गुदगुदाता-खिलखिलाता बच्चा अब क्यूँ नहीं दिखता,
पहले वाला बच्चा अब क्यूँ नहीं दिखता।
पारियों की कहानियों में मगन,
हाथ बटाने का दिल से लगन,
अपने खिलौनों को पूरे मुहल्ले में दिखाता बच्चा अब क्यूँ नहीं दिखता,
पहले वाला बच्चा अब क्यूँ नहीं दिखता।
मेहमान के आने की उमंग,
पकवान और कुछ पैसे पाने की तरंग,
अपने नन्हे हाथों से गुल्लक छुपाता बच्चा अब क्यूँ नहीं दिखता,
पहले वाला बच्चा अब क्यूँ नहीं दिखता।
संयुक्त परिवार का वो प्यार,
निश्छल और प्रेम-पूर्ण व्यवहार,
चचेरे को भी अपना भाई बताता बच्चा अब क्यूँ नहीं दिखता,
पहले वाला बच्चा अब क्यूँ नहीं दिखता॥
By Suman Rai

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