फौजी
By Rajneesh Singh Yadav
हर राह पर चल चुका है तू ,
संघर्ष की ज्वाला से तप चुका है तू।
रुकना न अब , थमना न अब ,
तू खुद की अब पहचान बना।
मंज़िल तेरी है अब निकट ,
विजय होना है तुझको ऐ मुसाफिर ,
विप्पति चाहे जितनी हो विक।
दुर्गम परिस्तिथि भी आएगी ,
मन तेरा विचलित कर जाएगी।
जो भयभीत न हो , तू ऐसा वीर है ,
दुश्मन के लिए तू अंगरी तीर है।
वक़्त की भांति चलता जा , तू लड़ता जा ,तू लड़ता जा।
परिवार से तू है अलग , मिलती न उनकी एक भी झलक ,
फिर भी है सीना तान खड़ा ,
है दुश्मनो से बेखौफ लड़ा।
जय हिन्द।
By Rajneesh Singh Yadav

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