पथिक
By Ridham Chaudhary
जब खुदगर्जी के आलम में,
हर ओर पाए तू अंधकार।
तब घोर मनन करके ओ पथिक,
तू स्वयं का चरित्र बलवान देख।।
और देख सके अगर नील गगन,
अंधियारे में चमकते ये कण।
तब तू भी यूं एक तारा बन,
स्वयं से परे ये संसार देख।।
संसार जो माया नगरी है,
बहकाएगी फुसलाएगी।
तेरे महत्व की गाथा,
तुझको बार-बार सुनवाएगी।।
तब तू लक्ष्य को बना मछली की आंख,
अर्जुन सा डट कर लड़ जाना।
और अपनी पथिक कुशलता से
बस आगे बढ़ते जाना,
तू बस आगे बढ़ते जाना।।
By Ridham Chaudhary

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