नारी
By Anjali parashar
जो देवी के स्वरूप में,
प्रांगण में पूज्नीय है,
वो स्त्री के स्वरूप में
सदन में आबंध हैं!!
है बेड़ियों से जकड़ी हुई
शालीनता अधीन है,
दबे हुए से स्वर हैं, उसके
अबला सी प्रतिबिंब है!!
स्मरण कर की तु वही
जो काली का स्वरुप है
शास्त्र संग शस्त्र भी
तेरे आगे अधीन हैं!!
है जल रही जो लौ, तेरे,
साथ हुए अन्याय की
भस्म कर तू दे उसे
सशक्त बनके सबल सी!!
सजग, सबल, समर्थ
स्वभिमान तू सचेत है
जो बेड़ियों से बधी नहीं
नारी है तू, तू भेंट है
समाज मे तू श्रेष्ठ है!!
By Anjali parashar

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